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कौन हैं सरदार वल्लभ भाई पटेल जी ?
गांधीजी के करीबी दोस्त एवं सहपाठी, दुर्लभ तथा कठोर निर्णय लेने में सक्षम,स्वतंत्र भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री एवं लौह-पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी को "सरदार" ऐसे ही नहीं कहा जाता, बारदौली में किसानों के साथ चलाए गए उनके आंदोलन को भुलाया नहीं जा सकता।
क्या है बारदौली सत्याग्रह ?
भारतीय स्वाधीनता संग्राम के दौरान सन् 1928ईo के जून के महीने में गुजरात में हुआ बारदौली सत्याग्रह एक प्रमुख किसान आंदोलन था जिसका नेतृत्व वल्लभ भाई पटेल ने किया था। उस समय प्रांत की सरकार ने किसानों के लगान को 22 प्रतिशत तक बढ़ा दिया था। इसी वजह से वल्लभ भाई पटेल जी ने इस लगान वृद्धि का जमकर विरोध किया। पटेल साहब के इस सत्याग्रह आंदोलन को निष्क्रिय करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने अनेकों कठोर कदम उठाए, लेकिन फिर भी विवश होकर उन्हें किसानों की मांगों को मानना ही पड़ा।
आन्दोलन की सफलता और "सरदार" की उपाधि
तब न्यायिक अधिकारी बूमफील्ड और राजस्व अधिकारी मैक्सवेल ने संपूर्ण मामलों की जांच की और 22 प्रतिशत लगान वृद्धि को गलत ठहरा कर इसे घटाते हुए 6.03 प्रतिशत कर दिया। इस सत्याग्रह आंदोलन के सफल हो जाने के बाद में बारदौली की औरतों ने वल्लभ भाई पटेल जी को ‘सरदार’ की उपाधि प्रदान की।
आन्दोलन के सन्दर्भ में गांधीजी के वक्तव्य
किसानों के साथ वल्लभ भाई पटेल जी के इस सत्याग्रह आंदोलन और राष्ट्रीय स्वाधीनता संग्राम के मध्य के अंर्तसबंधों की व्याख्या करते हुए गांधी जी ने कहा "इस तरह का प्रत्येक संघर्ष, प्रत्येक कोशिश हमें स्वराज प्राप्ति के करीब पहुंचा रही है और हम सबको स्वराज की मंजिल तक पहुंचाने में ये संघर्ष सीधे स्वराज के लिए संघर्ष से कहीं ज्यादा सहायक सिद्ध हो सकते हैं।"
The Review Time
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