चंद्रशेखर आजाद:भाग-3 युवाओं में स्वदेश प्रेम जाग्रत करने के लिए आजाद जी द्वारा रचित कविता




यदि आपने हमारी इस सीरीज के प्रथम दो भागों को नहीं देखा है तो आप जाकर अभी उन्हें देख सकते हैं। भारत के वीर सपूत अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद जी के बारे में हम आपको 'आज़ाद’ शब्द से संबंधित तथ्य तथा उनके महान विचारों के संदर्भ में आपको पिछले पोस्टो में बता ही चुके हैं। आज हम आपको चंद्रशेखर आजाद जी द्वारा लिखी कविता के बारे में बता रहे हैं -

कविता लिखने के उद्देश्य -
उनके इस कविता को लिखने के निम्न उद्देश्य थे-
1-मातृभूमि के लिए युवाओं में उत्साह एवं भक्ति जाग्रत तथा प्रोत्साहित करना
2-स्वतंत्रता संग्राम को और ज्यादा तेज करना
3-उग्र दलों का हौसला बढ़ाना


आजाद जी बड़े ही बहादुर और निडर स्वभाव के व्यक्ति थे। उनके मुख का तेज़ भी कुछ ऐसा था कि डर भी डगमगा जाए। आज़ाद जी के जैसा जोशीला शायद ही कोई दुनिया में हो। उनके जैसे चरित्र वाला ना कोई आज तक पैदा हुआ है और ना ही होगा और यदि कोई हुआ है तो वह हैं वो खुद 'चंद्रशेखर आजाद'

आजाद जी द्वारा लिखित कविता

आजाद जी द्वारा लिखी कविता जो आज भी उनके शौर्य एवं बलिदान का गुणगान करती है-

"मां हम विदा हो जाते हैं, विजय केतु फहराने आज,
तेरी बलिवेदी पर चढ़कर, मां निज शीश कटाने आज।

मलिन वेष ये आंसू कैसे,कंपित होता है क्यों गात? 
वीर प्रसूति क्यों रोती है, जब खंग लगे हमारे हाथ

 धरा शीघ्र ही धसक जाएगी, जब टूट जाएंगे झुके तार,
 विश्व कांपता रह जाएगा, होगी मां जब रण हुंकार।

 नृत्य करेगी रण प्रांगण में,फिर-फिर खंग हमारीआज, अरि शिर गिराकर यही कहेंगे, भारत भूमि तुम्हारी आज।

अभी शमशीर कातिल ने, न ली थी अपने हाथों में।      हजारों सिर पुकार उठे, कहो दरकार कितने हैं।।"  


The Review Time 

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1 टिप्पणियाँ
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  1. ये ब्लॉग पढ़ने लिखने वाले युवाओं के लिए बहुत ही उपयोगी है।ये हमें हमारे देश के इतिहास और महापुरुषों से सम्बंधित ऐसी जानकारियाँ और तथ्यों के बारे में बताता है जो शायद ही किसी को मालूम हों।

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